प्रयागराज जनपद (.प्र.) में भूमि उपयोग प्रतिरूप का अध्ययन

 

सागर सिंह1, कुमार प्रणव वर्मा2

1शोध छात्र (जे.आर.एफ.), भूगोल विभाग, मड़ियाहूँ पी. जी. कालेज, मड़ियाहूँ, जौनपुर (.प्र.)

2असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, मड़ियाहूँ पी. जी. कालेज, मड़ियाहूँ, जौनपुर (.प्र.)

*Corresponding Author E-mail: sagarsingh4945@gmail.com

 

ABSTRACT:

भूमि उपयोग प्रतिरूप, एक क्षेत्र के विकास और उपयोग के लिए योजना तैयार करने की प्रक्रिया है। यह विकास की दिशा, भूमि के विभाजन निर्माण की स्थिति और पर्यावरण प्रभावों का मूल्यांकन करती है। अध्ययन क्षेत्र जनपद प्रयागराज मुख्यतः समतल मैदान प्रदेश है, जिस कारण भूमि की उपयोगिता का महत्व अधिक है। यहां के लोगों की आर्थिक प्रगति भूमि उपयोगिता एवं उसके विकास पर निर्भर है। भूमि पर जनसंख्या का दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है जिससे भूमि पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है, अतः इसके अनुकूलतम उपयोग की आवश्यकता है। प्रयागराज जनपद की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है एवं क्षेत्र में खनिज संसाधनों एवं पर्याप्त पूंजी का अभाव है। अतः इस क्षेत्र का समन्वित विकास कृषि में सुधार के माध्यम से ही किया जा सकता है। नियोजन की ऐसी प्रक्रिया हो जिससे प्रति इकाई भूमि से अधिकतम लाभ की प्राप्ति की जा सके। इसी उद्देश्य से प्रस्तुत शोध पत्र में भूमि उपयोग प्रतिरूप का अध्ययन किया गया है, जिसके लिए द्वितीयक एवं तृतीयक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए जिला सांख्यिकीय पत्रिका एवं आंकड़ों का प्रयोग किया गया है।

 

KEYWORDS: भूमि उपयोग, संसाधन, नियोजन, समन्वित विकास।

 

 


INTRODUCTION:

भूमि उपयोग में प्राकृतिक पर्यावरण या जंगल का प्रबंधन और संशोधित वातावरण जैसे कि बस्तियां और अर्ध-प्राकृतिक आवास जैसे कृषि योग्य क्षेत्र, चारागाह और प्रबंधित जंगल शामिल हैं। भूमि उपयोग उन व्यवस्थाओं, गतिविधियों और इनपुट का कुल योग है जो लोग एक निश्चित भूमि कवर प्रकार में करते हैं(एफएओ, 1997 ; एफएओ/यूएनईपी, 1999)1

 

बारलोव (1954) के अनुसार भूमि संसाधन उपयोग, भूमि समस्या एवं योजना संबंधी विवेचना की धुरी है। भूमि उपयोग को प्रभावित करने वाले कारकों में उन समस्त प्राकृतिक कारकों को समाहित किया जाता है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भूमि उपयोग को प्रवाहित करते हैं जैसे- जलवायु, धरातलीय मृदा, सूर्याताप, उच्चावच, वर्षा, जलीय धारा इत्यादि। ये सभी प्राकृतिक कारक भूमि उपयोग की सीमाओं को नियंत्रित करते हैं।2

 

मानव सभ्यता के प्रारम्भ से ही भूमि संसाधन का अधिकाधिक उपयोग मानव का चरम लक्ष्य रहा है क्योंकि उसकी संस्कृति और सभ्यता के मूल में भूमि का महत्वपूर्ण स्थान रहा है (मौर्या, एस.डी. 2012)3 प्रयागराज जनपद एक प्राचीन सांस्कृतिक नगर रहा है, जहां गंगा एवं यमुना जैसी बड़ी नदियों का समागम दिखता है। इन नदियों के कारण मैदानी क्षेत्रों में जल की उपलब्धता सुनिश्चित कराकर भूमि की उपयोगिता को बढ़ाया जा सकता है। प्रयागराज के जमुनापर क्षेत्र में दोमट मिट्टी एवं बलुई मिट्टी का विस्तार अधिक है जबकि गंगापार क्षेत्र बलुई दोमट एवं मृत्तिका से ढ़का हुआ है जो इसे महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र में वर्गीकृत करता है।4

 

अध्ययन क्षेत्र:-

शोध प्रस्ताव का अध्ययन क्षेत्र उत्तर प्रदेश का प्रयागराज जनपद है। प्रयागराज उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में 25026’ उत्तरी अक्षांश एवं 81050’ पूर्वी देशांतर पर स्थित है। इसका भौगोलिक क्षेत्रफल 5482 वर्ग किमी. है। इसके दक्षिण-दक्षिण पूर्व में बघेलखण्ड क्षेत्र, पूर्व में उत्तर भारत की मध्य गंगा घाटी (पूर्वांचल), दक्षिण-पश्चिम में बुंदेलखण्ड तथा उत्तर-उत्तर पूर्व में अवध क्षेत्र है। प्रयागराज जनपद से लगे अन्य जनपद जौनपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, चित्रकूट, मिर्जापुर एवं संतरविदासनगर (भदोही) है। इस क्षेत्र के चयन का कारण पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों का अधिक निवास स्थान होना है।

 

fp=&1% Location of the Study Map

 

प्रयागराज जिले में 8 तहसील, 20 विकासखण्ड एवं 3084 निवासित गांव हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार अध्ययन क्षेत्र की कुल जनसंख्या 59,54,391 है। जिसमें शहरी एवं ग्रामीण जनसंख्या क्रमशः 15,36,031 तथा 44,18,360 है। साक्षरता 72.32 है, जिसमें पुरुषों एवं महिलाओं की क्रमशः 82.55 तथा 60.97 है। जनसंख्या घनत्व 1086 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है तथा लिंगानुपात 901 है।5

 

प्रयागराज गंगा-यमुना नदियों के संगम पर स्थित है जिसके कारण कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां नम उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु पायी जाती है। यहां की प्रमुख फसलें गेहूँ, चावल, अरहर, चना आदि है। नहर एवं ट्यूबवेल सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं।6

 

शोध अध्ययन का उद्देश्य:-

1. भूमि उपयोग प्रतिरूप की स्थिति का आकलन करना।

2. ग्रामीण विकास हेतु नियोजित भूमि उपयोग की भूमिका का अध्ययन करना।

 

आंकड़ा स्रोत तथा शोध विधि तंत्र:-

प्रस्तुत शोध पत्र में द्वितीयक एवं तृतीयक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए अध्ययन क्षेत्र का भौतिक एवं सांस्कृतिक मानचित्र तथा तालिकाओं का प्रयोग किया गया है। अन्य सामाजिक, आर्थिक तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए राष्ट्रीय जनगणना 2011, जनपदवार भूमि उपयोग के सरकारी आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। यह शोध पत्र व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक अनुसंधान पर आधारित है।

 

परिणाम एवं परिचर्चा:-

भूमि उपयोग प्रतिरूप एक महत्वपूर्ण योजनाकारी और प्रबंधन प्रक्रिया है जो संतुलित और स्थायी विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यह योजनाओं का निर्माण, स्थापना और अनुरक्षण का काम करता है ताकि भूमि का उपयोग अनुकूल, समृद्ध और समान रूप से हो सके। भूमि के आदर्श उपयोग हेतु यह आवश्यक है कि भूमि का उपयोग जिस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है उसकी व्याख्या एवं समीक्षा की जाए। भूमि उपयोग की दृष्टि से भूमि को वन भूमि, चारागाह भूमि, कृषित भूमि, बंजर भूमि, वर्तमान एवं परती भूमि, कृषि हेतु अनुप्रयुक्त भूमि आदि मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है।7

 

तलिका-1 प्रयागराज जनपद में भूमि उपयोग प्रतिरूप का विवरण क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

o"kZ

ou {ks=

catj Hkwfe

vU; mi;ksx ds varxZr {ks=

Ñf"k csdkj Hkwfe

?kklHkwfe pkjkxkg] >kfM+;ka o`{k vkfn

orZeku ,oa vU; ijrh Hkwfe

'kq) cks;k x;k {ks=

2010&11

21455

16585

78094

13335

9656

76546

499018

2017&18

21476

14947

94690

11340

7293

54638

352690

 

प्रयागराज जनपद में भूमि उपयोग का प्रतिशत विवरण

 

चित्र-2                                           चित्र-3

तालिका 2: विकासखण्डवार प्रयागराज जनपद में भूमि उपयोग प्रतिरूप (2017-18) क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

Ø-la-

fodkl [k.M uke

Ñf"k Hkwfe

ou Hkwfe

Ñf"k csdkj Hkwfe

orekZu ijrh Hkwfe

vU; ijrh Hkwfe

catj Hkwfe

vU; mi;ksx gsrq Hkwfe

?kkl Hkwfe] pkjkxkg] o`{k ,oa >kfM+;ka

1-

dkSafM+gkj

19374

132

392

9303

3290

1225

9755

709

2-

gksykx<+

12477

0

71

765

532

299

2462

585

3-

eÅvkbek

12777

12

152

477

404

511

1249

169

4-

lksjkao

10769

10

126

437

1009

114

2535

266

5-

cgfj;k

18173

0

88

937

225

1079

6024

288

6-

Qwyiqj

17707

0

275

1707

707

1220

6135

514

7-

cgknqjiqj

21075

0

239

2165

353

1577

5899

142

8-

izrkiiqj

14463

1

48

1851

534

320

5215

280

9-

lSnkckn

14016

2

34

2119

335

359

3120

745

10-

/kuqiqj

12645

18

70

986

403

155

4912

359

11-

gafM;k

13123

0

151

1063

335

239

2818

268

12-

tljk

18310

0

321

1384

562

1210

3735

83

13-

'kadjx<+

22452

5218

3708

2969

2184

1376

1871

406

14-

pkdk

9399

0

293

387

360

1603

3677

289

15-

djNuk

16082

0

162

856

1029

113

7028

570

16-

dksaf/k;kjk

16083

0

212

414

416

170

2889

242

17-

m#ok

11900

17

44

648

338

252

3739

235

18-

estk

24165

4383

859

2408

1520

1774

1131

83

19-

dksjkao

45315

6415

762

365

480

240

3062

897

20-

ekaMk

15923

5264

2172

1646

1035

378

5407

82

ैवनतबमरू ैजंजपेजपबंस क्पंतलए क्पतमबजवतंजम िम्बवदवउपबे ंदक ैजंजपेजपबेए ळवअजण् िन्ण्च्ण्

 

अध्ययन क्षेत्र में भूमि उपयोग प्रतिरूप:-

1. शुद्ध बोया गया क्षेत्र:- प्रयागराज जनपद में वर्ष 2010-11 में शुद्ध बोया गया ़क्षेत्र 4,99,018 था जो कि वर्ष 2017-18 में 3,52,690 हेक्टेयर रह गया है, अर्थात् लगभग 29.32 की गिरावट दर्ज की गई है। विकासखण्ड कोरांव, मेजा, शंकरगढ़, कौंड़िहार में अपेक्षाकृत अन्य विकासखण्डों की तुलना में शुद्ध बोया गया ़क्षेत्र अधिक है। वहीं सोरांव, चाका, मऊ आइमा में सबसे कम क्षेत्र शुद्ध बोए गए क्षेत्र हैं (तालिका-2)

 

2. कृषि बेकार भूमि:- कृषि योग्य बेकार भूमि के अंतर्गत पथरीली बंजर भूमि, लवणीय भूमि, रेतीली भूमि एवं जलभराव वाली भूमि को शामिल किया जाता है। ऐसी भूमि का मुख्य कारण अनुचित भूमि प्रबंधन, अति सिंचाई, रसायनों का अनियंत्रित प्रयेाग है। वर्ष 2010 से वर्ष 2018 के मध्य इसमें 14.96 की गिरावट आयी है (तालिका-2) विकासखण्ड शंकरगढ़, माण्डा, कोरांव, मेजा में कृषि बेकार भूमि का क्षेत्र अधिक है (तालिका-2)

 

3. वर्तमान एवं अन्य परती भूमि:- वर्तमान परती भूमि के अंतर्गत एक वर्ष हेतु छोड़ी गई भूमि तथा अन्य परती भूमि में 2 से 5 वर्ष के लिए परती छोड़ी गई भूमि आती है। वर्ष 2010-11 की तुलना में वर्ष 2017-18 में इसमें 28.62 की कमी आयी है (तालिका-1) विकासखण्ड कौंड़िहार, शंकरगढ़, मेजा, बहादुरपुर में वर्तमान एवं परती भूमि का क्षेत्र अधिक है जबकि विकासखण्ड कोरांव, कौंधियारा, होलागढ़ में बहुत कम क्षेत्र परती भूमि के अंतर्गत है (तालिका-2)

 

4. वन:- वन भूमि के अंतर्गत लगभग 4 क्षेत्र अधिसूचित है (चित्र: 2) वर्ष 2017-18 के आंकड़ों के अनुसार यह कुल 21476 हेक्टेयर है। शंकरगढ़, मेजा, कोरांव, मांडा एवं कौड़िहार विकासखण्ड में वन भूमि के अंतर्गत अधिसूचित क्षेत्र अधिक है, जबकि बहरिया, फूलपुर, चाका, करछना आदि विकासखण्डों में कोई भूमि वन क्षेत्र के अंतर्गत अधिसूचित नहीं है।

 

5. अन्य उपयोग हेतु भूमि:- इसके अंतर्गत कृषि हेतु अनुपलब्ध भूमि, जैसे- बस्तियां, सड़के, रेलवे, नहरें, तालाब आदि शामिल होते हैं। यह कुल अधिसूचित क्षेत्र का लगभग 17 है (चित्र-1) कौंड़िहार, बहरिया, फूलपुर, करछना, माण्डा, प्रतापपुर एवं बहादुरपुर विकासखण्ड की अधिकांश भूमि इस क्षेत्र के अंतर्गत आती है (तालिका-2)

 

6. बंजर भूमि:- इस भूमि के अंतर्गत जनपद प्रयागराज के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 3 क्षेत्र है (चित्र-2) विकासखण्ड कौंड़िहार (1225 हेक्टेयर), चाका (1603 हेक्टेयर), मेजा (1774 हेक्टेयर), फूलपुर (1220 हेक्टेयर), बहादुरपुर (1577 हेक्टेयर) में बंजर भूमि का प्रतिशत अधिक है (तालिका-2) वर्ष 2010-11 की तुलना में वर्ष 2017-18 में 1638 हेक्टेयर की कमी आयी है (तालिका-1)

 

7. घासभूमि, चारागाह, वृक्ष एवं झाड़ियां:- इसके अंतर्गत कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 1 क्षेत्र शामिल है (चित्र-2) कौंड़िहार, कोरांव, फूलपुर, करछना एवं शंकरगढ़ विकासखण्डों में इस प्रकार के क्षेत्र अधिक हैं, जबकि जसरा, मेजा एवं मांडा मंे क्रमशः 83 हेक्टेयर, 83 हेक्टेयर, 82 हेक्टेयर, भूमि ही घासभूमि, चारागाह एवं झाड़ियों के अंतर्गत है।

 

निष्कर्ष:-

प्रयागराज जनपद की जलवायु नम उपोष्ण कटिबंधीय है, जिस कारण यह कृषि प्रधान जिला भी है। यहां की मुख्य फसलें गेहूँ एवं चावल है। कुछ क्षेत्रों में दाल जैसे अरहर, उरद, और चना की खेती की जाती है। नहर एवं ट्यूबवेल सिंचाई के मुख्य साधन हैं। विकासखण्ड वार सभी क्षेत्र एक समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में बंजर एवं परती भूमि का क्षेत्र अधिक है तो कहीं पर शुद्ध बोए गए क्षेत्र का प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2011 से 2017-18 के मध्य तुलनात्मक अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि जहां शुद्ध बोए क्षेत्र में अधिक गिरावट दर्ज की गई है वहीं बंजर भूमि, कृषि बेकार भूमि एवं परती भूमि में भी गिरावट देखी गई है जो कि जनपद के निवासियों हेतु एक अच्छा संकेत है।

 

अध्ययन क्षेत्र प्रयागराज जनपद में निम्नलिखित प्रतिमानों के नियोजित प्रयोग एवं प्रबंधन द्वारा भूमि उपयोग को सकारात्मक रूप में उपयोगी बनाया जा सकता है:-

1.  जनपद के अधिकांश क्षेत्र में गेहूँ एवं चावल की खेती की जाती है। कृषि की उत्पादकता बढ़ाने हेतु दो फसली या बहुफसली कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है।

2.  शंकरगढ़, मेजा, माण्डा जैसे विकासखण्डों में सिंचाई बढ़ाकर, उचित बीजों का प्रयोग बढ़ाकर एवं कृषि औजारों की कुशलता बढ़ाकर कृषि बेकार भूमि को भी कृषि योग्य बनाया जा सकता है।

3.  फसलों के चयन में प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादकता वाली फसलों एवं वाणिज्यिक फसलों एवं सब्जियों जैसे- गन्ना, टमाटर, मक्का, ज्वार आदि का चयन करके अधिकतम कृषि उत्पादन किया जा सकता है।

4.  निश्चित क्षेत्र में लागत मूल्य घटाकर भी कृषि उत्पादन से अधिकतम लाभ प्रापत किया जा सकता है।

5.  शहरी एवं ग्रामीण वानिकी तथा भूमि के एक हिस्से में वृक्षों को लगाकर फूलपुर, बहादुरपुर, चाका, करछना जैसे विकासखण्डों में वन भूमि का प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है।

 

संदर्भ ग्रंथ सूची:-

1-     कृषि नीति 2013, उत्तर प्रदेश सरकार

2-     महीप चौरसिया, प्रमोद कुमार तिवारी. जनपद जौनपुर (.प्र.) में भूमि उपयोग प्रतिरूप का एक भौगोलिक अध्ययन. प्दजण् श्रण् त्मअण् ंदक त्मेण् ैवबपंस ैबपण् 2020; 8(3) 161-166.

3-     मौर्या, एस.डी, 2005: अधिवास भूगोल, शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद (प्रयागराज) पृ. 70-73

4-     जनपदवार भूमि उपयोग: उत्तर प्रदेश वन विभाग

5-     जिला सांख्यिकीय पत्रिका, जनपद प्रयागराज

6-      केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड: जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकारChaturvedi, Richa. Application of Remote Sensing of GIS in Land Use/Land Covers Mapping in Allahabad District. IJAIET. Vol 4, No.4. December 2014

7-      District Industrial Profile of Allahabad District (Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises).

8-      hindi.indiawaterportal.org     

9-      http://prayagraj.nic.in/Geography

10-    isfr-2019-vol-ii-Uttar Pradesh

11-    Kumar, Vijay. Agrawal, S. Agricultural land use change analysis using remote sensing and GIS: A case study of Allahabad, India. 2019   

12-    Statistical Diary, Directorate of Economics and Statistics, Govt. of U.P.

13-    www.upforest.gov.in

 

 

Received on 01.05.2024         Modified on 16.05.2024

Accepted on 27.05.2024         © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2024; 12(2):131-136.

DOI: 10.52711/2454-2687.2024.00022